Epstein Files : क्या Epstein Island का वास्तु इन घिनौने कृत्यों के पीछे है बड़ी वजह
Posted on: 08 Feb, 2026
Epstein Files : आजकल के चर्चित केस Epstein Files को सुनकर लोगों के मन में बहुत से सवाल है, वैसे तो इस तरह के कृत्य के लिए व्यक्ति के स्वभाव का बहुत बड़ा हाथ होता है। इतने छोटे उम्र के बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार करना किसी मानसिक बीमारी का ही संकेत है। लेकिन इसमें गौर करने वाली बात यह है कि जितने भी नाम इस फाइल में सामने आए है, उनमें से बहुत से लोगों के इस चर्चित Epstein Island से बाहर कोई खास केस नही दर्ज हुए है। तो इसके पीछे के कुछ कारण हम मान सकते है कि Epstein Island का वास्तु नकारात्मकता से भरा था। आइए जानते है इसके कुछ पहलू -
जगह का स्वभाव और उसका प्रभाव
जिस Island की चर्चा हो रही है, उसका वास्तविक नाम Little Saint James है। यह एक पूरी तरह से अलग-थलग प्राइवेट द्वीप है, जहाँ सामान्य सामाजिक जीवन, नियम और जवाबदेही लगभग नहीं के बराबर थी। वास्तु के मुताबिक ऐसी जगहें बहुत प्रभावशाली होती हैं, क्योंकि वहाँ व्यक्ति समाज से कटकर केवल अपनी इच्छाओं और भावनाओं के साथ रहने लगता है, वहां उसका आत्म-नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है।
Isolation : वास्तु का सबसे बड़ा दोष
वास्तु शास्त्र में Isolation यानी अलगाव को सबसे बड़ा दोष माना गया है। जब कोई स्थान सामाजिक संपर्क से कट जाता है, और वहाँ कोई देखने-टोकने वाला नहीं होता, तो उस जगह पर तामसिक ऊर्जा बढ़ने लगती है। तामसिक ऊर्जा का प्रभाव यह होता है कि व्यक्ति की इच्छाएँ बढ़ जाती हैं और सोचने-समझने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है। ऐसे माहौल में इंसान वह सब करने लगता है, जिसे वह आम परिस्थितियों में कभी स्वीकार नहीं करता।
दिशा दोष और Privacy की भूमिका
वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा रहस्य, नियंत्रण और प्रभुत्व से जुड़ी होती है, जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा आग, आवेग और इच्छाओं को बढ़ाती है। जब किसी स्थान की रचना इस तरह की हो कि वह अत्यधिक गोपनीय, बंद और बाहरी दुनिया से कटी हुई हो, तो यह जोड़ व्यक्ति के अंदर छिपी इच्छाओं को बढ़ावा देता है, यह छिपी इच्छाएं कभी भी पॉजिटिव नही होती। इंसान की सोचने की शक्ति को Privacy निगेटिव दिशा की ओर खींचकर ले जाती है।
जल तत्व और Mental imbalance
ऐसे द्वीप चारों ओर से पानी से घिरे होते हैं। वास्तु के अनुसार अधिक जल तत्व Emotional imbalance पैदा करता है। व्यक्ति वास्तविक दुनिया से कटने लगता है और उसे यह महसूस होने लगता है कि उसके कर्मों का कोई Immediate outcome नहीं होगा। यही सोच गलत रास्तों की ओर ले जाती है।
भूमि दोष और Karmic imprint वास्तु शास्त्र मानता है कि जहाँ बार-बार भय, शोषण और पीड़ा होती है, वहाँ भूमि अपनी एक Negative memory बना लेती है, जिसे भूमि दोष या Architectural defect कहा जाता है। ऐसी जगह पर रहने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे Insensitive हो जाता है और सही-गलत का अंतर कम महसूस करने लगता है।
Conclusion
वास्तु के अनुसार किसी स्थान की एनर्जी व्यक्ति के चरित्र को गहराई से प्रभावित कर सकती है। Negative Energy वाली जगह अच्छे इंसान को भी गलत दिशा में ले जा सकती है। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र में स्थान को उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है, जितना व्यक्ति के स्वभाव को। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखने योग्य है कि जगह के वास्तु से ज्यादा इंसान के स्वंय के विचार इस तरह के कृत्य के लिए जिम्मेदार होते है।
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